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shankaracharya ji : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी 99 साल की उम्र में ब्रह्मलीन

रविवार, 11 सितंबर 2022 | सितंबर 11, 2022 WIB Last Updated 2022-09-11T11:56:10Z
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मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का स्वर्गवास 99 साल की उम्र में हो गया। स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज करोड़ों सनातन हिन्दुओं की आस्था के ज्योति स्तंभ थे। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी दो मठों (द्वारका एवं ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य थे।



स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का जन्म मध्य प्रदेश राज्य के सिवनी जिले में जबलपुर के पास दिघोरी गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा था। महज नौ साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ धर्म की यात्रा शुरू कर दी थी।


इस दौरान वो उत्तरप्रदेश के काशी भी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री जी महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 1942 के इस दौर में वो महज 19 साल की उम्र में क्रांतिकारी साधु के रुप में प्रसिद्ध हुए थे। क्योंकि उस समय देश में अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई चल रही थी।


स्वामी स्वरूपानंद जी ने ली दंड दीक्षा

स्वामी स्वरूपानंद जी ने 1950 में वे दंडी संन्यासी बनाये गए और 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली। 1950 में ज्योतिषपीठ के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड-सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे।


जगतगुरु शंकराचार्य जी का 99 वर्ष की उम्र में निधन, झोतेश्वर मंदिर में उन्होंने अंतिम सांस ली


जगतगुरु शंकराचार्य जी का 99 वर्ष की उम्र में निधन, झोतेश्वर मंदिर में उन्होंने अंतिम सांस ली, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (Shankracharya Swami Swaroopanand Saraswati) का निधन हो गया है।


शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर के झोतेश्वर मंदिर में उन्होंने अंतिम सांस ली, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती 99 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

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