Notification

×

ad

ad

News Today : भारत और ब्रिटेन ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने की महत्वाकांक्षी कार्य योजना 2030 को स्वीकृति दी

बुधवार, 5 मई 2021 | मई 05, 2021 WIB Last Updated 2021-05-05T07:30:33Z
    Share

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्‍सन ने द्विपक्षीय संबंधों को व्‍यापक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने की महत्‍वाकांक्षी कार्य योजना 2030 को मंजूरी दी है। इससे अगले दस वर्ष में दोनों देशों के लोगों के बीच सम्‍पर्क, व्‍यापार और अर्थव्‍यवस्‍था, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और स्‍वास्‍थ्य क्षेत्र में आपसी सहयोग और मजबूत होगा।

news today



दोनों नेताओं के बीच कल हुई वर्चुअल शिखर बैठक मे कोविड स्थिति और महामारी से निपटने के प्रयासों में सहयोग और कोविड वैक्सीन के संबंध में सफल साझेदारी पर विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में कोविड संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने में ब्रिटेन के चिकित्‍सा सहयोग के लिए प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्‍सन का आभार व्‍यक्‍त किया। श्री जॉन्सन ने पिछले वर्ष ब्रिटेन और अन्‍य देशों को चिकित्‍सा सामग्री और वैक्‍सीन उपलब्‍ध कराने के लिए भारत की सराहना की।



दोनों प्रधानमंत्रियों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्‍यापार दोगुने से भी अधिक करने के महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य के साथ संवर्धित व्‍यापार साझेदारी का शुभारम्‍भ किया। इसके तहत भारत और ब्रिटेन एक व्‍यापक और संतुलित मुक्त व्‍यापार समझौते की कार्य योजना बनाने पर भी सहमत हुए। व्‍यापार साझेदारी बढने से दोनों देशों में प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे।



वर्चुअल बैठक में भारत-अमरीका वैश्विक नवाचार साझेदारी की घोषणा की गई। इसका उद्देश्‍य अफ्रीका से आरम्‍भ कर कुछ चुने हुए विकासशील देशों को भारतीय नवाचारों का हस्‍तांतरण करने में सहयोग देना है। दोनों देश नई और उभरती प्रौद्योगिकी तथा आपूर्ति श्रृंखला व्‍यापक करने में सहयोग पर सहमत हुए। आतंकवाद से निपटने, समुद्री और साइबर क्षेत्र सहित रक्षा और सुरक्षा संबंध मजबूत करने भी सहमति बनी। दोनों प्रधानमंत्रियों ने हिंद- प्रशांत और जी-सात समूह में सहयोग सहित परस्‍पर हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।




भारत और ब्रिटेन ने प्रवासन और एक-दूसरे के देश में आने-जाने की व्‍यापक साझेदारी का भी शुभारम्‍भ किया। इससे विद्यार्थियों और पेशेवरों को दोनों देशों में अधिक अवसर उपलब्‍ध होंगे।

लोकप्रिय पोस्ट