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मात्रशक्ति को प्रणाम : धर्म और कर्म साथ-साथ, 15 घंटे का रोजा... इस बीच कोविड सेंटर संभालती हैं इंदौर की दो महिला डॉक्टर | MP news

बुधवार, 5 मई 2021 | मई 05, 2021 WIB Last Updated 2021-05-05T14:31:05Z
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सेवा का अगर जज्बा हो तो सामने पहाड़ सी दिखने वाली परेशानी भी छोटी हो जाती है। कोरोना का संक्रमण और ऊपर से 15 घंटे का रोजा। रोज ऑटो से 110 किलोमीटर का सफर (आना-जाना) किसी की भी हिम्मत को डिगा सकता है, लेकिन इंदौर की दो यंग लेडी डॉक्टर अपने फर्ज से पीछे नहीं हटीं। वह रोज इंदौर से उज्जैन कोविड मरीजों के इलाज के लिए आती हैं।

Dr. Sobia Ansari
Dr. Sobia Ansari

महाकाल की नगरी उज्जैन का माधव नगर कोविड अस्पताल, जहां पर टेस्टिंग की सुविधा भी है। नए शहर का पूरा बोझ इसी अस्पताल पर है। यहां बड़ी संख्या में सर्दी खांसी और बुखार वाले मरीज आ रहे हैं। इंदौर निवासी डॉक्टर सोबिया अंसारी और डॉक्टर रुखसार शेख की ड्यूटी कोविड टेस्ट सेंटर में लगी है।

Dr. Rukhsar Sheikh
Dr. Rukhsar Sheikh

उन्हें सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंचना रहता है। दोनों के रोजे चल रहे हैं। ऐसे में रोजाना सुबह 3 बजे ही उन्हें उठना पड़ता है। दोनों वहां दो बजे तक छह घंटे तक कोविड मरीजों की देखभाल करती हैं। इसके बाद वहां से शाम 4 बजे तक इंदौर लौटती हैं। थकने के सवाल पर दोनों कहती हैं, थकान तो मरीजों को देख कर ही उतर जाती है।

यही लगता है कि मरीज 3-3 घंटे लाइन में होंगे, जल्द पहुंच जाएं

डॉ. रुखसार ने कहा, जैसे भी हो सबसे पहले खुदा की इबादत करते हैं और फिर मानव सेवा में जुट जाते हैं। घर से निकलते हैं, तो बस यही लगता है कि उज्जैन में मरीज को 3 -3 घंटे की लाइन में नहीं लगना पड़े। अभी भीड़ ज्यादा है। इसके बावजूद सभी मरीजों को देखते हैं। सुबह धर्म को मान रहे हैं, तो ड्यूटी पर सेवा और कर्म कर रहे हैं।

रोजा रखना हमारा धर्म है, मानव सेवा हमारा कर्म

इंदौर की ही रहने वाले डॉ. सोबिया कहती हैं कि सुबह से उठ जाना और फिर दिन भर भूखे रहना वो खुदा के लिए है। यह हमारा धर्म है। दिन में 8 से 2 बजे तक इस महामारी के दौर में मानव सेवा करते हैं। यही हमारा कर्म है।

रोजाना जाती हैं ऑटो से

डॉ.सोबिया और डॉ. रुखसार दोनों ने नेशनल हेल्थ मिशन की तहत करीब 3 महीने पहले आयुष विभाग में ज्वॉइन किया था। उज्जैन में घर देख ही रही थीं कि कोरोना कर्फ्यू लग गया। बसें बंद हो गईं। 15 दिन पहले घर के पास ही रहने वाले ऑटो चालक से बात की। अब वह ऑटो से ही आना-जाना करती हैं।

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