Notification

×

ad

ad

What is truth:- हम जिस शरीर को अपना मानते हैं। वह कभी अपना था ही नहीं !!!!!!!

रविवार, 11 अप्रैल 2021 | अप्रैल 11, 2021 WIB Last Updated 2021-04-11T17:51:27Z
    Share

 


*हम जिस शरीर को अपना मानते हैं। वह कभी अपना था ही नहीं पर परमात्मा अपने हैं। और अपने रहेंगे वह अपने से कभी विमुख नहीं हुए हमीं उन से विमुख हुए हैं।। वह परमात्मा बड़े मधुर हैं बड़े प्रिय हैं। और अपने में हैं।। ऐसा मानने पर वे स्मरण किए बिना ही याद रहेंगे, भजन किए बिना ही उनका भजन होगा उनमें स्वत: ही ऐसी प्रियता होगी जैसी अपने शरीर में और अपने जीते रहने में भी नहीं है।जगत में जितने भी चराचर प्राणी है सबके अंदर आत्मा और अंतर्यामी रूप से भगवान विराजमान है। भगवान ही उन सब रूपों में प्रकट है। उनकी सेवा करना उन्हें सुख पहुंचाना और उनका हित करना हमारा धर्म है।। जगत के प्राणियों से द्वेष-द्रोह करने, छल कपट, मीठे बोल कर दूसरों को धोखा देने से, अपनी शक्ति का प्रयोग करके दूसरों को दबाने  और धोखा देने से या किसी भी प्रकार का स्वांग बनाने और साधु वेश धारण करने से  भगवान प्रसन्न नहीं होते भगवान की प्रसन्नता के लिए निर्मल मन जिसमें अहिंसा, सत्य, अलोभ, संतोष, दया, वैराग्य, प्रेम, ब्रह्मचर्य, नम्रता, उदारता, मधुरता श्रद्धा, क्षमा आदि देवी गुण भरे हो और सबसे प्रधान रूप में चाहिए - भगवान के प्रति मन में अहैतू की विशुद्ध भक्ति मानव जीवन बहुत थोड़े समय के लिए प्राप्त हुआ है।। और भगवान को प्रसन्न करने उनको प्राप्त करने के लिए हुआ है। यदि यह कार्य जीवन में ना बन पड़ा और जीवन व्यर्थ बीत गया तो जीवन की व्यर्थता ही नहीं,  महान पाप का संग्रह भी होगा जो अनंत काल तक दुख देता रहेगा।।*


🌺🙏🌺जय श्री राधे🌺🙏🌺

ad

लोकप्रिय पोस्ट