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Special muhurt:- _चैत्र नवरात्रि / गुड़ी पड़वा 2021 की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 | अप्रैल 13, 2021 WIB Last Updated 2021-04-13T04:16:32Z
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 *🚩_चैत्र नवरात्रि / गुड़ी पड़वा 2021 की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व_🚩*



🌐 *_शालिवाहन ने मिट्टी के सैनिकों की सेना तैयार की थी और उससे प्रभावी शत्रुओं का पराभव किया था। इसे विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।_*


 ⚛️ *_गुड़ी पड़वा तिथि और मुहूर्त:_*

 


🌹 *_गुड़ी पड़वा मंगलवार, अप्रैल 13, 2021_*


📜 *_प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 12 अप्रैल 2021 दिन सोमवार की सुबह 08 बजे से।_*

🧾 *_प्रतिपदा तिथि समाप्त- 13 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार की सुबह 10 बजकर 16 मिनट तक।_*

 

👉🏼 *_गुड़ी पड़वा महत्व:_*

 

*_पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ही ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड का निर्माण किया था। ऐसे में इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है। साथ ही कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा के दिन सारी बुराईयों का नाश हो जाता है। वहीं, व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है।_*

 

*🏆_महाराष्ट्र में इस दिन कई तरह के जुलूस आयोजित किए जाते हैं। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं। साथ ही मित्रों एवं रिश्तेदारों के साथ त्यौहार का आनंद लेते हैं। कई लोग अपने घरों में अलग-अलग तरह के पारंपरिक व्यंजन जैसे पूरन पोली और श्रीखंड आदि बनाते हैं। महाराष्ट्र में मीठे चावल बनाए जाते हैं। इन्हें सक्कर भात कहा जाता है। इस दिन सूर्योदय से शुरू होकर पूरे दिन अनुष्ठान चलते हैं।_*


 ✡️ *_गुड़ी पड़वा पूजा विधि-_*

 

*_1. गुड़ी पड़वा के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि किया जाता है।_*


*_2. इसके बाद मुख्यद्वार को आम के पत्तों से सजाया जाता है।_*


*_3. घर के एक हिस्से में गुड़ी लगाई जाती है। इसे आम के पत्तों, पुष्प और कपड़े आदि से सजाया जाता है।_*


*_4. इसके बाद भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है और गुड़ी फहराते हैं।_*


*_5. गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।_*

🙏🌟🔱🚩🅿🌹📯🌞🙏


🔔 *_चैत्र नवरात्रि या वासन्तिक नवरात्र का आरम्भ 13 अप्रैल से हो रहे हैं और 21 अप्रैल तक चलेंगे। नवरात्रों का यह त्योहार हमारे भारतवर्ष में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसका जिक्र पुराणों में भी अच्छे से मिलता है। वैसे तो पुराणों में एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्रों का जिक्र किया गया है, लेकिन चैत्र और अश्विन माह के नवरात्रों को ही प्रमुखता से मनाया जाता है। बाकी दो नवरात्रों को तंत्र-मंत्र की साधना हेतु करने का विधान है। इसलिए इनका आम लोगों के जीवन में कोई महत्व नहीं है। महाशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा की संज्ञा दी गई है।_*


👉🏼 *_13 अप्रैल, मंगलवार: चैत्र नवरात्रि प्रारंभ,घटस्थापना_*


👉🏼 *_14 अप्रैल, बुधवार: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी पूजा_*


👉🏼 *_15 अप्रैल, गुरुवार: चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा पूजा_*


👉🏼 *_16 अप्रैल, शुक्रवार: चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन- मां कुष्मांडा पूजा_*


👉🏼 *_17 अप्रैल, शनिवार: चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन- मां स्कन्दमाता पूजा_*


👉🏼 *_18 अप्रैल, रविवार: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन- मां कात्यायनी पूजा_*


👉🏼 *_19 अप्रैल, सोमवार: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन- मां कालरात्रि पूजा_*


👉🏼 *_20 अप्रैल, मंगलवार: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन- मां महागौरी की पूजा, दुर्गा अष्टमी, महाष्टमी_*


👉🏼 *_21 अप्रैल, बुधवार: राम नवमी, भगवान राम का जन्म दिवस।_*


👉🏼 *_22 अप्रैल, गुरुवार: चैत्र नवरात्रि पारण_*


⚛️ *_कलश स्थापना मुहूर्त_*


🌟 *_अभिजित मुहूर्त :-  सुबह 11 बजकर 56 मिनट से  दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक_*

🐑 *_मेष लग्न (चर लग्न) :- सुबह 6 बजकर 02 मिनट से 7 बजकर 38  मिनट तक_*


🐂 *_वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) :- सुबह 7 बजकर 38 मिनट से 9 बजकर 34 मिनट तक_*


🦁 *_सिंह लग्न (स्थिर लग्न) :- दोपहर  2 बजकर 7 मिनट से 4 बजकर 25 मिनट तक_*


 🕰️ *_कलश स्थापना का सही समय_*


*👆🔱कलश स्थापना का सही समय सुबह 7 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक_💎*


👉🏼 *_ऐसे करें कलश स्थापना_*


*_उत्तर-पूर्व कोने में जल छिड़क कर साफ मिट्टी या बालू रखनी चाहिए। उस साफ मिट्टी या बालू पर जौ की परत बिछानी चाहिए। उसके ऊपर पुनः साफ मिट्टी या बालू की साफ परत बिछानी चाहिए और उसका जलावशोषण करना चाहिए। जलावशोषण यानि उसके ऊपर जल छिड़कना चाहिए। फिर उसके ऊपर मिट्टी या धातु के कलश की स्थापना करनी चाहिए और अब कलश को गले तक साफ, शुद्ध जल से भरना चाहिए और उस कलश में एक सिक्का डालना चाहिए। अगर संभव हो तो कलश के जल में पवित्र नदियों का जल जरूर मिलाना चाहिए। इसके बाद कलश के मुख पर अपना दाहिना हाथ रखकर इस मंत्र का जप करना चाहिए। मंत्र है_*


*_गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!_*

*_नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेSस्मिन् सन्निधिं कुरु।।“_*


*_साथ ही वरूण देवता का भी आह्वाहन करना चाहिए कि वो उस कलश में अपना स्थान ग्रहण करें। इसके बाद कलश के मुख पर कलावा बांधकर ढक्कन या मिट्टी की कटोरी से कलश को ढक देना चाहिए। अब ऊपर ढकी गयी कटोरी में जौ अथवा चावल भर लें। इसके बाद एक जटा वाला नारियल लेकर उसे लाल कपड़े से लपेटकर उसके ऊपर कलावा बांधें, इस प्रकार बंधे हुए नारियल को जौ या चावल से भरी हुई कटोरी के ऊपर स्थापित करें। ध्यान रहे कलश के ऊपर रखी गयी कटोरी में घी का दीपक जलाना उचित नहीं है। कलश का स्थान पूजा के उत्तर-पूर्व कोने में होता है जबकि दीपक का स्थान दक्षिण-पूर्व कोने में होता है।_*


⚱️ *_ध्यान रहे कि कलश स्थपना कि सारी विधि नवार्ण मंत्र पढ़ते हुए करनी चाहिए। नवार्ण मंत्र है- “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे”।_*


*_नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बड़ा ही फलदायी बताया गया है। जो व्यक्ति दुर्गासप्तशती का पाठ करता है, वह हर प्रकार के भय, बाधा,  चिंता और शत्रु आदि से छुटकारा पाता है। साथ ही उसे हर प्रकार के सुख-साधनों की प्राप्ति होती है। अतः नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए।_*


🚩 *_ऐसे करें ध्वजारोपण_*


*🚩नवरात्र के पहले दिन ध्वजारोपण की भी परंपरा है। इस दिन अपने घर के दक्षिण-पूर्व कोने, यानि अग्नि कोण में पांच हाथ ऊंचे डंडे में, सवा दो हाथ की लाल रंग की ध्वजा लगानी चाहिए । ध्वजा लगाते समय सोम, दिगंबर कुमार और रूरू भैरव देवताओं की उपासना करनी चाहिए और उनसे अपनी ध्वजा की रक्षा करने की प्रार्थना करनी चाहिए । साथ ही अपने घर की सुख-समृद्धि के लिये भी प्रार्थना करनी चाहिए । ये ध्वजा जीत की प्रतीक मानी जाती है। इसे घर पर लगाने से केतु के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और साल भर घर का वास्तु भी अच्छा रहता है।_*


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