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Aaj ka panchang : जानिए क्या है आज विशेष

शनिवार, 17 अप्रैल 2021 | अप्रैल 17, 2021 WIB Last Updated 2021-04-17T03:44:07Z
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 🕉️🔱💐श्री गणेशाय नमः💐🔱🕉️


दिनांक --------- 17 अप्रैल 2021


दिन ------------ शनिवार, 

aaj ka panchang



सम्वत ----------- 2078 आनंद नाम सम्वत्सर चैत्र मास शुक्ल पक्ष पँचमी तिथि, पूरे दिन व रात्रि में 8:33 बजे तक, तत पश्चात षष्ठी तिथि, 


नक्षत्र ---------- मृगशिरा पूरे दिन व रात्रि में 2:34 बजे तक, तत पश्चात आर्द्रा नक्षत्र, 


योग ---------- शोभन सायं काल 7:18 बजे तक, तत पश्चात अतिगण्ड योग, 


चन्द्रमा ---------- वृष राशि में दिन में 1:09 बजे तक, तत पश्चात मिथुन राशि में, 


राहू काल ---------- दिन में 9  बजे से 10:30 बजे तक, 


आज ----------  श्री पँचमी हैं, आज नवरात्रि का पंचम दिवस हैं, आज माँ भगवती श्री स्कंदमाता जी की आराधना, ध्यान ,पूजा, जप, पाठ करना चाहिए, दुर्गा सप्तशती, नवार्ण मन्त्र ,दुर्गा चालीसा आदि का पाठ करना चाहिए, आज कल्पादि पँचमी तिथि हैं, 

आज शनिवार हैं, हनुमानजी एवम शनिदेव जी का आराधन,पूजन, जप, पाठ , आदि करना चाहिए, हनुमानजी के मंदिर में सिंदूर,चमेली का तेल, लड्डू,या गुड़, एक लाल झंडा " जयश्रीराम" लिखकर दक्षिणा अर्पित करके दर्शन करना चाहिए, एवम सरसों के तेल से बना भोजन  गरीबो को, फकीरो को, कौवों को दान करना चाहिए, सूर्यास्त के बाद सरसों के तेल का दीपक पीपल के वृक्ष के समीप प्रज्ज्वलित करना चाहिए, एवम सूर्यास्त के बाद श्री दशरथकृत शनिस्तोत्रम का पाठ करना चाहिए, 

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞


⛅ *दिनांक 17 अप्रैल 2021*

⛅ *दिन - शनिवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2078 (गुजरात - 2077)*

⛅ *शक संवत - 1943*

⛅ *अयन - उत्तरायण*

⛅ *ऋतु - वसंत* 

⛅ *मास - चैत्र*

⛅ *पक्ष - शुक्ल* 

⛅ *तिथि - पंचमी रात्रि 08:32 तक तत्पश्चात षष्ठी*

⛅ *नक्षत्र - मॄगशिरा 18 अप्रैल रात्रि 02:34 तक तत्पश्चात आर्द्रा*

⛅ *योग - शोभन शाम 07:19 तक तत्पश्चात अतिगण्ड*

⛅ *राहुकाल - सुबह 09:28 से सुबह 11:03 तक*

⛅ *सूर्योदय - 06:19* 

⛅ *सूर्यास्त - 18:57* 


🙏🌹🌟🅿🔥📯🔱🙏


*_शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र - ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।_*


☄️ *_दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।_*

*_पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।_*

*_शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।_*


📝 *_तिथि स्वामीः- पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता हैं तथा षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी हैं।_*


🪙 *_नक्षत्र स्वामीः- मृग नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं तथा आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु जी हैं।_*


⚜️ *_दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से अदरक खाकर जायें।_*


🚓 *_यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।_*


👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।_*


🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-जरूरतमंदों को खाद्य तेल दान करें।_*


🌴 *_वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*


⚛️ *_पर्व व त्यौहार- श्रीपंचमी, लक्ष्मी पंचमी, नाग पंचमी, नवरात्री का पांचवां दिन - मां स्कंदमाता व्रत_*


✍🏼 *_विशेष – पञ्चमी को बिल्वफल एवं षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद एवं शुभ तिथि मानी जाती है। इसके स्वामी नागराज वासुकी हैं तथा पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।_*🅿


*_नवरात्र के वास्तु शास्त्र में आज की चर्चा देवता और फूलों की। देवता या देवियां की एक ख़ास किस्म के एनर्जी पैटर्न हैं और फूल सुगंध और रंग का मिला-जुला रूप और इनका सीधा सम्बन्ध घर के वास्तु शास्त्र से है। इसी सत्य को पहचान कर भारतीय मनीषियों ने तंत्र सार, मन्त्र महोदधि और लघु हारीत में लिखा है कि - सफ़ेद और पीले फूल विष्णु को प्रिय हैं, लाल फूल-सूर्य, गणेश और भैरव को प्रिय हैं, भगवान शंकर को सफ़ेद पुष्प पसंद है लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि किस एनर्जी पैटर्न को कौन सा रंग या गंध फेवरेबल नहीं है, तो नोट करिये भगवान विष्णु को अक्षत यानि चावल, मदार, और धतूरे के फूल नहीं चढ़ाने चाहिये।  माता को दूब, मदार, हरसिंगार, बेल एवं तगर नहीं चढ़ाना चाहिये।_*

*_चंपा और कमल को छोड़ कर किसी पुष्प कि कली नहीं चढ़ानी चाहिये, कटसरैया नागचम्पा, और बृहती के पुष्प वर्जित माने गये हैं। इन बातों का ध्यान करके आप अनायास वास्तु दोष से बच सकते हैं। उम्मीद है आप इस वास्तु टिप्स को अपनाकर जरुर लाभ उठाएंगे।_*🅿

🚩🌟🔥🔱🌟🔥🔱🚩


            *_नरसिंह गायत्री_*

                ~~~~~~~~~

*_ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि_* 

*_तन्नो नरसिंह प्रचोदयात ।।_*

*_प्रतिदिन रक्त चन्दन की माला से पांच माला के जाप से आप पर भगवान नरसिंह की प्रचन्ड कृपा होगी_*

*_इस महा मंत्र के जाप से क्रूर ग्रहों का ताप शांत होता है_*

*_कालसर्प दोष, मंगल, राहु ,शनि, केतु का बुरा प्रभाव नहीं हो पाता, व्यक्ति के समस्त कार्य अपने आप सिद्ध हो जाते है ।_*

*_एक माला सुबह नित्य करने से शत्रु शक्तिहीन हो जाते हैं_*

*_संध्या के समय एक माला जाप करने से कवच की तरह आपकी सदा रक्षा होती है_*

*_यज्ञ करने से भगवान् नरसिंह शीघ्र प्रसन्न होते हैं।_*

*_इस महामन्त्र के पुर्ण पुरष्चरण से अनेकानेक सिद्धिया प्राप्य होती है । व्यक्ति नृसिंह भगवान का तेज धारण कर लेता है । उस व्यक्ति के सामने भूत, प्रेत, पिसाच ब्रम्हराक्षस और अन्य देवता भी टिक नही पाते ।_*


*🚩_श्रीकृष्ण जगत गुरु वंदे....विष्णु जगतपते।_*🔱


⚜️ *माता जगतजननी, जगदम्बा भवानी दुर्गा देवी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है। इन्हें स्कन्द कुमार कार्तिकेय की जननी के वजह से स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। कार्तिकेय को पुराणों में कुमार, शौर, शक्तिधर आदि के नाम से भी इनके शौर्य का वर्णन किया गया है। इनका वाहन मयूर है अतः इन्हें मयूरवाहन के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है।_*

*_नवरात्रि के नव दिनों तक व्रत और उपवास करनेवाले साधक का मन इस दिन अर्थात पांचवें दिन विशुद्ध चक्र में होता है। क्योंकि माता स्कन्दमाता की पूजा नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे रहते हैं। स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल का फुल पकड़ा हुआ है।_*

*_माता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी वजह से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है परन्तु इनका भी वाहन सिंह ही है। स्कन्द माता की पूजा भक्तों को उनके माता के वात्सल्य से भर देता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से समस्त दुःखों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति का मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है।_*

*_रूप और सौंदर्य की अद्वितिय आभा लिए हुए माता अभय मुद्रा में कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। पद्मासना देवी, विद्यावाहिनी दुर्गा तथा सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी यही स्कन्दमाता ही हैं। इनकी उपासना से साधक अलौकिक तेज पाता है, क्योंकि यही हिमालय की पुत्री पार्वती भी हैं। इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है जो अपने पुत्र से अत्यधिक प्रेम करती हैं।_*

*_इनको अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है। जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान ही स्नेह लुटाती हैं। स्कंदमाता की पूजा उसी प्रकार से करना चाहिए जैसे अन्य सभी देवियों का पूजन किया जाता है। शुद्ध चित से देवी का स्मरण करना चाहिए तथा पंचोपचार, षोडशोपचार या फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार स्कन्दमाता की पूजा करने के पश्चात भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए।_*

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🌷 *आर्थिक परेशानी हो तो* 🌷


🙏🏻 *स्कंद पुराण में लिखा है पौष मास की शुक्ल पक्ष की दसमी तिथि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी(17 अप्रैल 2021 शनिवार) और सावन महीने की पूनम ये दिन लक्ष्मी पूजा के खास बताये गये हैं | इन दिनों में अगर कोई आर्थिक कष्ट से जूझ रहा है | पैसों की बहुत तंगी है घर में तो 12 मंत्र लक्ष्मी माता के बोलकर, शांत बैठकर मानसिक पूजा करे और उनको नमन करें तो उसको भगवती लक्ष्मी प्राप्त होती है, लाभ होता है, घर में लक्ष्मी स्थायी हो जाती हैं | उसके घर से आर्थिक समस्याए धीरे धीरे किनारा करती है | बारह मंत्र इसप्रकार हैं –*


🌷 *ॐ ऐश्‍वर्यै नम:*

🌷 *ॐ कमलायै नम:*

🌷 *ॐ लक्ष्मयै नम:*

🌷 *ॐ चलायै नम:*

🌷 *ॐ भुत्यै नम:*

🌷 *ॐ हरिप्रियायै नम:* 

🌷 *ॐ पद्मायै नम:* 

🌷 *ॐ पद्माल्यायै नम:* 

🌷 *ॐ संपत्यै नम:*

🌷 *ॐ ऊच्चयै नम:*

🌷 *ॐ श्रीयै नम:*

🌷 *ॐ पद्मधारिन्यै नम:*

👉🏻 *सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्ति प्रदायिनि | मंत्रपूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते ||*


👉🏻 *द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यय पठेत | स्थिरा लक्ष्मीर्भवेतस्य पुत्रदाराबिभिस: ||*


🙏🏻 *उसके घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है | जो इन बारह नामों को इन दिनों में पठन करें |*


💥 *विशेष ~ 17 अप्रैल 2021 शनिवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है ।*🅿


🌷 *चैत्र नवरात्रि* 🌷


🙏🏻  *नवरात्र की पंचमी तिथि यानी पांचवे दिन माता दुर्गा को केले का भोग लगाएं ।इससे परिवार में सुख-शांति रहती है ।*


🌷 *चैत्र नवरात्रि* 🌷


🙏🏻 *स्कंदमाता की पूजा से मिलती है शांति व सुख*

*नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाली हैं। देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जानते हैं। स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि जीवन स्वयं ही अच्छे-बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम है व हम स्वयं अपने सेनापति हैं। हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती रहे। इसलिए स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिए, जिससे कि ध्यान वृत्ति एकाग्र हो सके। यह शक्ति परम शांति व सुख का अनुभव कराती हैं।*

🅿☀️❤️☀️❤️☀️❤️☀️🅿


*_“समय मूल्यवान है ..._*


*_अगर भविष्य है तो धैर्य रखें ..._*

*_अगर बीता हुआ कल है तो उससे सीखें ..._*

*_और वर्तमान है तो उसे जाया जाने ना दे!_*


*_बीते हुए कल से सीखे‚_* *_वर्तमान में जीए‚ और भविष्य के लिए आशावादी रहें ...”_*


*🙏🏻समय की पुकार है ... समय की कद्र करो ...🌹*


🙏🔥🌞🌟🅿🏆🌹🔱🙏


🌺🙏🌺जय श्री राधे🌺🙏🌺

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