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2nd day /:-🪴द्वितीयं माँ ब्रह्मचारिणी🪴_जानिए माँ के इस रूप के बारे में।।

बुधवार, 14 अप्रैल 2021 | अप्रैल 14, 2021 WIB Last Updated 2021-04-14T02:48:26Z
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      *_🕉️नवरात्र विशेष🕉️_* 


          *_🪴द्वितीयं ब्रह्मचारिणी🪴_* 


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 _*दूसरे नवरात्र में मां के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक मां के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं।*_ 

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 _*🍇क्या चढ़ाएं प्रसाद 🍇:——*_ 

 

_*मां भगवती को नवरात्र के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए मां को शक्कर का भोग प्रिय है। ब्राह्मण को दान में भी चीनी ही देनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य दीर्घायु होता है। इनकी उपासना करने से मनुष्य में तप, त्याग, सदाचार आदि की वृद्धि होती है।*_



 *_ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप ज्योर्तिमय है। ये मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा इनके अन्य नाम हैं। इनकी पूजा करने से सभी काम पूरे होते हैं, रुकावटें दूर हो जाती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। इसके अलावा हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है।_* 

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 *_🌺ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि🌺_* 

 

 *_देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और  प्रार्थना करते हुए नीचे लिखा मंत्र बोलें।_* 

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 *_🙏ध्यान मंत्र🙏——_* 

 *_"वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।_* 

 *_जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥"_* 

 

 *_"गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।_*

 *_धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥"_* 

 

 *_इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें।  देवी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाएं। और निम्नलिखित मंत्रों से प्रार्थना करें।_* 

 

 *_या देवी सर्वभू‍तेषु मातृ रूपेण संस्थिता।_* 

 *_"नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥"_* 


 *_"दधाना कर पद्माभ्याम् अक्षमाला कमण्डलू।_* 

 *_देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥"_* 

 

 _*इसके बाद देवी मां को प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें। प्रदक्षिणा के बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें।*_ 


 🌺🙏🌺जय श्री राधे🌺🙏🌺

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