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अच्छा वक्ता कैसे बनें ? motivational speech | personality development in hindi

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020 | दिसंबर 18, 2020 WIB Last Updated 2021-04-01T09:34:40Z
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Personality Development in Hindi:- यह जरूरी नहीं कि किसी समूह के समक्ष भाषण (SPEECH) देने के लिए आप कोई नेता हो, उच्च पद पर हों या फिर सभा अध्यक्ष ही हो। समूह का कोई सदस्य या एक साधारण व्यक्ति भी भाषण speech देकर अपने विचारों को व्यक्त कर सकता है। जनता के समक्ष बोलने की यह कला हमारे व्यक्तित्व personality का एक आवश्यक अंग है। आइये जानते है अच्छा वक्ता कैसे बनें ? motivational speech, personality development के लिय बहुत आवश्यक है 


अच्छा वक्ता कैसे बनें ? motivational speech | personality development in hindi


जनता के समक्ष ही क्यों, अपने मित्रों, रिश्तेदारों, दफ्तर के साथियों या किसी पार्टी में (भाषण, speech) बातचीत किस प्रकार की जाए (How to be a good speaker) इस कला से बहुत से लोग अनाभिश होते हैं। नतीजा यही होता है कि ऐसे लोग कोने में चुपचाप सहमें-सहमे खड़े रहते हैं। मान लो किसी ने बोलने को कह दिया तो जबान लड़खड़ा जाएगी और पसीना आ जाएंगा  कुछ ऐसे भी होते हैं जो बोलगे अवश्य, परन्तु लगातार अनर्गल गाते, कूटनीतिक एवं आलोचनात्मक नजरिये से बोलते जाएंगे जिससे सुनने वाले 'बोर' हो जाते हैं और बुरे फंसे' सोचकर शीघ्र ही वहां से पलायन करना चाहते है, क्योंकि वक्ता (speaker) नहीं जानता कि समय का ध्यान रखना मंच की शोभा होती है।







मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में बोलने के अवसर अक्सर आते रहते हैं। यहां पर दो बातों पर ध्यान देना होगा-भाषण (speech) की कला और बातचीत की कला। यद्यपि दोनों में मुख्यतः बोलने की कला की समानता है, फिर भी कुछ मामूली अन्तर भी है जिनका हमें ध्यान रखना होगा।


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भाषण देने का डर | Fear of speaking





भाषण देना एक ऐसी कला है (Speech is an art) जिसका महत्व धर्मोपदेशक, व्यापारी. प्रशासनिक अधिकारी, नेता और मालिक भली-भांति जानते हैं। अच्छा भाषण सिर्फ मीठी बोली से नहीं उपजता। इसके लिए हृदय से निकले विचारों का अति महत्व है। मंच पर जाकर भाषण देने में बहुत से व्यक्ति कतराते हैं, क्योंकि वे घबराते है। उनके मन में भय समाया (Fear of speaking) रहता है। यह भय Fear किसी भी कारण से हो सकता है-हीन भावना, अति संवेदनशीलता, सकोच, विचारों का संगठित न होना, जनता द्वारा अस्वीकार किया जाना तैयारी या अभ्यास न होना आदि-आदि। यह एक सामान्य भय है जिससे बड़े-बड़े नेता तक ग्रस्त पाए गए हैं। अब्राहम लिंकन ने भी इस कमजोरी को स्वीकार किया है। तनिक अभ्यास एवं आत्मविश्वास से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।







बोलने की कला व्यक्तित्व की परिचायक हैं | The art of speaking





यदि स्टेज पर बोलने का मौका मिले तब विचलित न हो। कुछ छोटी-मोटी बातों पर ध्यान दें और आगे बढ़ें। भाषण से पूर्व वस्त्रों पर ध्यान दें। सुरुचिपूर्ण एवं मौसम तथा अवसर के अनुकूल पहने गए वस्त्र व्यक्तित्व को निखारते हैं। स्टेज पर सादगी एवं आत्मविश्वास से आयें। सीट पर सही तरीके से बैठें। बार-बार कपड़े ठीक न करें ऐसा कोई कार्य न करें। जिससे जनता का ध्यान अनावश्यक रूप से आपकी तरफ जाए, जैसे दूसरे का भाषण सुनते हुए उबासी लेना या सो जाना। यदि घबराहट हो रही है तो एक हथेली को दूसरी हथेली से दबाकर तनाव कम कर सकते हैं। ऐसे समय गहरी सांस लेना भी लाभदायक होता है। बोलने का अवसर आने पर सीधे खड़े हों तथा शरीर का बोझ बार-बार पैरों पर न डालें।







भाषण का प्रारंभ | Insprirational Hindi Speech 





: इसे प्रारंभिक तैयारी के बाद बोलना Hindi Speech प्रारंभ करें। यह वही सुनहरा मौका होता है जब आप अपने व्यक्तित्व "personality" से जनता के अविस्मरणीय दिल को जीतकर उसे अपने पक्ष में कर सकते हैं तथा अपनी बात मनवा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने प्रारंभिक वाक्यों का चयन अति सावधानीपूर्वक करें। प्रारंभ के कुछ वाक्यों से ही जनता आपको पहचान लेगी कि आपका भाषण (Speech) उन पर क्या असर दिखाएगा। कुछ ही क्षणों बाद आप स्वयं इस तथ्य से परिचित हो जाएंगे और उसी के अनुरूप आप अपना विषय चुनकर बात आगे बढ़ा सकते हैं। याद रखें किसी भी भाषण के लिए यह अत्यन्त जरूरी है कि उससे सम्बन्धित पूर्व अभ्यास एवं तैयारी भली-भांति कर ली जाएं।


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अमरीका के राष्ट्रपति बुरडो विल्सन से किसी ने पूछा-"यदि आपसे सिर्फ दो मिनट का भाषण देने को कहा जाए तो आप उसकी तैयारी के लिए कितना समय लेंगे? जवाब था-दो सप्ताह", फिर पूछा गया, "और यदि आपको दो घंटे बोलने के लिए कहा जाए तब ?" इस बार राष्ट्रपति महोदय ने जवाब दिया मैं तैयार हूं।" इसका तात्पर्य यह है कि जितना छोटा भाषण होगा उतनी ही तैयारी अधिक करनी होगी। इस कला का स्वामी विवेकानन्द ने जिस बेहतरीन तरीके से उपयोग किया वैसे उदाहरण बिरले ही मिलते हैं। स्वामी विवेकानन्द को जब शिकागो में विश्व धर्म-सम्मेलन में भाषण के लिए आमंत्रित किया गया तब उन्हें सिर्फ तीन मिनट बोलने को कहा गया, किन्तु इस थोड़े से समय में उन्होंने जो सारगर्भित भाषण दिया वह वहां के जनमानस पर अपनी अमिट प छोड़ गया तथा अविस्मरणीय रहा। इसका एक मात्र कारण सिर्फ उनकी तैयारी था। उनके इस भाषण के प्रारंभिक शब्दों ने ही अमेरिकी जनता का दिल जीत लिया था। उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत ही "सिस्टर्स एण्ड ब्रदर्स ऑफ अमरीका" से की थी। यदि इसके बदले वे सामान्य शब्द "लेडीज एण्ड जैन्टिलमैन' बोलते, तब शायद वे उस भाषण में जादुई असर नहीं दिखा पाते।













क्या ध्यान रखें | Insprirational Hindi Speech





How to be a good speaker बोलते समय वाणी पर काबू रखें। अच्छे वक्ता Good speaker के लिए मधुर वाणी आवश्यक है। बहुत जोर से या बहुत धीरे न बोलें। इस समय चेहरे पर आनेवाले भाव Emotion अति महत्वपूर्ण हैं। प्रश्न पूछते समय भौंहों का उपयोग तथा चेहरे की मुस्कान के द्वारा आप वांछित प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। वाणी के उतार-चढ़ाव के समय चेहरे के भावों का मिश्रण अति आवश्यक एवं उत्तम रहता है। समय का ध्यान अवश्य रखें। जितने समय के लिए कहा जाए लगभग उतने ही समय तक भाषण सीमित रखें। अनावश्यक किस्से-कहानियां सुनाकर जनता को बोर न करें।







बोलते समय जनता में पर्याप्त रुचि बनाए रखें। यदा-कदा मनोविनोद का सहारा लें, किन्तु ऐसा भी न हो कि जनता को सिर्फ चुटकुले ही सुनाने लगें। रुचिपूर्ण संवाद बोलना, समय-समय पर उदाहरण देना, तथ्य बताना तथा छोटी-छोटी कहानियां सुनाना भी लाभदायक रहता है। Speech देते समय प्रयुक्त की जानेवाली भाषा का बड़ा महत्व होता है।







यदि अंग्रेजी में भाषण (Speech in english) दे रहे हैं, तब सही अंग्रेजी बोलें। अच्छा यह हो कि उपस्थित जनता की आकांक्षा के अनुरूप भाषा का उपयोग किया जाए। बहुत ज्यादा अलंकृत तथा क्लिष्ट भाषा का उपयोग न करें अपने विचारों में तथ्यों एवं तर्क का सही मिश्रण रखें। तर्क और बहस के अन्तर को समझें। विरोधी की बात को बहस द्वारा नहीं, बल्कि स्पष्ट तर्कों द्वारा खण्डित करें जनता आपसे स्वयं ही सहमत हो जाएगी। बोलते समय जनता की नब्ज पर पकड़ रखें। दर्शकों को देखें, किन्तु किसी एक पर नजरें न जमाएं। सबको ऐसा लगे कि आप उसे ही देखकर सम्बोधित कर रहे हैं।


personality development in hindi


श्रोता कई बार उग्र भी हो जाते है। ऐसे समय धैर्य से काम लें। कुछ लोग जानबूझकर अनावश्यक प्रश्न पूछते हैं ताकि सभा भंग हो जाए या भाषण समाप्त हो जाए। ऐसे लोगों की तरफ ध्यान न दें और प्रश्नों को बाद के लिए टाल दें। स्पष्ट मंतव्य से पूछे गये प्रश्नों का जवाब दे सकते हैं तथा देने में कोताही न बरतें, क्योंकि याद रखें प्रश्न किये ही इसलिए जाते है कि उनका जवाब मिले। इसलिए हर प्रश्न को टालना भी अच्छा नहीं होगा। यदि कभी अचानक बोलने को कह दिया जाए तब भी विचलित न हों। गहरी सांस लेकर विचारों को कम समय में एकत्र करने का यत्न करें और बोलना प्रारंभ करें।


ऐसे समय में जनता की भागीदारी तथा जनता से अधिक भागीदारी दोनों लाभप्रद हैं। उनसे प्रश्न आदि पूछकर बात बढ़ा सकते हैं अनावश्यक टीका-टिप्पणी करने से सिर्फ विवाद उत्पन्न होता है। इससे बचे। जो बात भाषण में पहले कह चुके हैं उसे दोहराने से बचें। अच्छे भाषण के लिए शुरुआत जितने खूबसूरत ढंग से की जाती है उसकी समाप्ति भी उतने ही खूबसूरत ढंग से की जानी चाहिए, क्योंकि अंत में कहे गए शब्द ही जनता को याद रहेंगे। अतःयह जरूरी है कि अपने स्पष्ट मंतव्य के साथ भाषण की समाप्ति भी सुगठित विचारों एवं सुगठित वाणी के द्वारा ही की जाए।











आपसी बातचीत कैसे करें | How to interact


अक्सर जनता के समक्ष खड़े होकर बोलने का मौका सबको नहीं मिल पाता, किंतु हम सभी अपने परिवार, मित्र, सहकर्मी, सहपाठी आदि के बीच अथवा समूह में बातचीत करते हैं। बातचीत किस प्रकार की जाए. यह भी एक कला है। भाषण देने की भांति आपसी बातचीत करने का तरीका हमारे व्यक्तित्व का परिचायक है। बातचीत करना एक ऐसी आनन्दकला है जिसके द्वारा हम तनावमुक्त हो सकते हैं। इसके लिए पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है। इसके फायदे भी बहुत है। इससे हमें शिक्षा मिलती है, और वैमनस्यता दूर होकर आपसी तालमेल एव सम्बन्धों में प्रगाढ़ता बढ़ती है. मित्रता बढ़ती है तथा हमारा ज्ञान बढ़ता है। बातचीत के माध्यम से हम उम्र के किसी भी मोड़ पर प्रसन्न बने रह सकते हैं। बातचीत के लिए भी कुछ सामान्य नियम है जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए। जहां तक संभव हो समूह में बात करते समय सामान्य रुचि का ध्यान रखें।


ऐसे समय धर्म या राजनीति जैसे किसी साम्प्रदायिक बिन्दु पर बात करके अनावश्यक द्वेषपूर्ण विवाद उत्पन्न करना उचित नहीं होगा। ऐसे शब्दों एवं विचारों को प्रकट न करें जिसे श्रोता सुनना पसन्द न करें। यदि दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे हैं तो एक-दूसरे की पसंद या रुचियों के बारे में लम्बे समय तक बातचीत की जा सकती है। यदि वे दोनों पेड-पौधों में रुचि रखते हैं, तब बागवानी के बारे में बातचीत करने से उन दोनी को आत्मीय प्रसन्नता होगी। मान लीजिए कि आपका कोई मित्र फिल्मों का शौकीन है तब उससे साहित्य की चर्चा बेमानी होगी। यदि बातचीत के समय आप वक्ता के विचारों से सहमत नही है तब अपनी असहमति को शालीन तरीके से प्रकट करें।


motivational speech | personality development in hindi


इस समय चिल्लाकर बोलना या कुतर्क करना गलत है। ऐसे समय पर दूसरे को मूर्ख या बुद्धिहीन कहना शालीनता के खिलाफ है और ऐसा करना दूसरे व्यक्ति को अपमानित करना है। एक बार ऐसे अवसरों पर पहले स्वयं की संभावित त्रुटियों पर मनन करें और फिर विश्वासपूर्वक अपनी बात दोहराए। यदि अब भी आप असहमत हैं, तब भी लेकिन शब्द के प्रयोग से बचें। यह कहना कि "हो सकता है कि आप सही सोच रहे हों, लेकिन मेरा विचार है तब इस वाक्य का अर्थ यह होगा कि मैं आपसे सहमत नहीं हूं।"लेकिन' के स्थान पर यहां और शब्द का प्रयोग करना बेहतर होगा। असहमति के बावजूद 'और शब्द लगाकर विचारों को इस तरीके से कहिए

















"मै आपके विचारों की कद्र करता हूं और मैं महसूस करता हूं यदि आप सहमत है, तब भी 'और शब्द का उपयोग इस प्रकार कर सकते हैं- मैं कि... आपसे सहमत हूं और यहां मैं यह जोड़ना चाहता हूँ कि ।" बोलते रहने की भांति चुप रहना भी एक कला है। दरअसल 'चुप रहना व चुप रहकर संवाद करना एक ऐसी कला है जिसका अभ्यास करना जरूरी है। बातचीत करते समय यदि आप किसी विषय पर असहमत हो सकते हैं, तो कोई दूसरा भी आपसे असहमत हो सकता है। ऐसे अवसर पर भी क्रोधित होना या उत्तेजित होना गलत है। असभ्य भाषा या द्विअर्थी संवादों को अपने पवित्र मन में जरा भी जगह न दें। कतई अपने विचारों को दूसरों पर थोपने की चेष्टा न करें।


motivational speech | personality development in hindi


लगातार स्वयं के ही बारे में बातचीत किए जाना सरासर गलत है। मैंने ऐसा किया, मैं ऐसा कर सकता हूं मेरे पुत्र ने यह कर दिखाया या मेरी बकरी बीमार हो गई जैसे विषयों पर लगातार देर तक एकतरफा बात करने से सामने वाला शीघ्र ही बोर हो जाएगा और आपसे किनारा कर लेगा। इसी प्रकार, जल्दी-जल्दी विषय बदलना भी अच्छा नहीं है। एक क्षण फिल्म पर चर्चा, दूसरे क्षण पारिवारिक चर्चा, तीसरे क्षण राजनीतिक चर्चा करना आपके मस्तिष्क की अस्थिरता को जाहिर करता है। विषय को अनावश्यक बदल देना या बातचीत को बीच में ही समाप्त कर आगे बढ़ जाना गलत है। किसी भी शुरुआत की असफलता का कारण ये गलतिया ही है। बातचीत करते समय शारीरिक भाषा बड़ी सहायक होती है। सामने वाले की आंखों से आंखे मिलाकर बात करें। होंठों पर जरा-सी मुस्कान भी रखें।


बोलते समय मुंह से थूक निकलना बहुत बुरा लगता है लेकिन, बात करते समय आंखें मटकाना विषय से भटकने के समान ही है। याद रखें बोलते समय आपके मुंह से थूक न निकले यह बहुत बुरा लगता है। समूह में बातचीत करते समय श्रोताओं को भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी बात को बीच में ही न कारटं। उसे बोलने का पर्याप्त अवसर दें और उसके बाद ही अपने विचार प्रकट करें। अच्छा तो यह है कि वाक्य समाप्त होने या बातचीत में विराम यानी उचित अवसर आने पर ही अपनी बात प्रारंभ करें। प्रारंभ से ही इस बात का अभ्यास करना जरूरी है ताकि वे अच्छे श्रोता भी बन सकें। है। याद रखें, समूह में बातचीत करना और स्टेज पर भाषण देना समान अभिव्यक्ति का माध्यम अवश्य है, किन्तु स्टेज पर हमें अधिक औपचारिक होना होगा, जबकि क्षेत्र समूह में अनावश्यक औपचारिकता अपनाकर हम मित्रता की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे। यह जरूरी है कि बातचीत कहा की जा रही है तथा किस अवसर पर की जा रही है इसका भी पूर्ण ध्यान रखा जाए। बातचीत की कला हमें बहुत कुछ सिखाती है।


यह सुनने एवं बोलने का संतुलन सिखाती है। यह सहमति या असहमति प्रकट करने का तरीका सिखाती है। यह सूचनाओं के आदान-प्रदान से हमार ज्ञानवर्द्धन कराती है। यह हमारे विचारों के अधिक स्पष्ट होने तथा सुगठित होने की परिचायक है। सही तरीके से भाषण देकर अथवा आपसी बातचीत के द्वारा हम दूसरों की निगाह में स्वय को ऊंचा उठा सकते हैं या नीचा गिरा सकते हैं । यह हमारे आत्मविश्वास को जाहिर करता है कि क्षेत्र कोई भी हो, विषय या स्थान कोई भी हो अच्छा वक्ता सब जगह अपना प्रभाव जमा सकता है। उसका यही प्रभावी भाषण जनमानस का सिरमौर बन सकता है।


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यह personality development in hindi सिरीज की पोस्ट नम्बर 3 है  यह पोस्ट आपको कैसी लगी कृपया कमेन्ट करके हमें जरूर बताय और इस पोस्ट को शेयर जरूर करे आप हमारे Whatsapp (वाट्सऐप)ग्रुप को भी ज्वाइन कर सकते है ……click here


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