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मध्यप्रदेश में भी अब लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश जारी

गुरुवार, 31 दिसंबर 2020 | दिसंबर 31, 2020 WIB Last Updated 2021-04-01T09:35:04Z
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मध्यप्रदेश में भी अब लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश जारी

मध्यप्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश अभी स्वीकृति के लिए राज्यपाल को भेजा गया है। और अनुमति मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा ।
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लव जिहाद के खिलाफ बनाए गए एक धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 के मसौदे को जारी किया गया है । इसे स्वीकृति मिलने के लिए राज्यपाल के पास आनंदीबेन पटेल को भेज दिया गया है । यह उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिन में अनुमति मिलते ही प्रदेश में यह जारी हो जाएगा ।
अधिनियम में प्रलोभन, बहला, बलपूर्वक या मंतातरण करवाकर विवाह करने या करवाने वाले को एक से लेकर 10 साल की कारावास और अधिकतम एक लाख तक अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। इस अध्यादेश में कुल 12 मसौदे को अनुमोदित किया गया है।
यह वर्ष 2020 की अंतिम कैबिनेट बैठक में किया गया है इसमें रखे गए है कठोर प्रावधान ।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से कैबिनेट बैठक आयोजित की थी इस बैठक में धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश को लेकर बताया कि इसमें कठोर प्रावधान रखे गए हैं मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर कतिपय लोग इस तरह की गतिविधियां कर रहे थे। जिसे बर्दाश्त के नहीं किया जा सकता और गलत वाख्या करके अपना मत छुपा रहे थे पर अब विवाह करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह है प्रमुख अध्यादेश
1.अगर महिला नाबालिक या कोई अनुसूचित जनजाति या जाति के व्यक्ति का मंतातरण करवाता है। तो उसे कम से कम 2 या अधिकतम 10 साल के कारावास और कम से कम ₹50000 का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
2.कोई सामूहिक मंतातरण दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक ही समय मंतातरण अध्यादेश के प्रावधानों के विरुद्ध होगा तो उल्लंघन करने पर कम से कम 5 और अधिकतम से अधिक 10 साल का कारावास तथा कम से कम ₹100000 का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
3.मंतातरण के मामले में शिकायत माता-पिता या कोई भाई बहन पुलिस थाने में करवानी होगी। अभिभावक भी प्रकरण दर्ज करवा सकते हैं । अधिनियम के तहत या अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होगा और इसकी सुनवाई सत्र न्यायालय में ही होगी।
4. अध्यादेश में बताया गया है कि उप निरीशक स्तर के नीचे का अफसर जांच नहीं कर सकेगा।
5.नए अध्यादेश के अनुसार मंतातरण करवाने वाली संस्था के सदस्यों के खिलाफ भी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध की सामान्य सजा का प्रावधान रखा गया है।
6.अध्यादेश में मूलमत में को मंतातरण नहीं माना जाएगा । मूल मत वह माना जाएगा जो जन्म के समय पिता का मत होगा।
7. अध्यादेश में पीड़ित महिला व बच्चों को भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार होगा । बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी भी माना जाएगा।
8. अध्यादेश के अनुसार स्वेच्छा से मंतातरण करने और करवाने वाले को 7 दिन पहले कलेक्टर को सूचना देनी ही होगी
9.अधिनियम में निर्दोष होने के सबूत प्रस्तुत करने की बाध्यता अभियुक्त पर रखी गई है।
लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश उत्तर प्रदेश हिमाचल प्रदेश हरियाणा उत्तराखंड कर्नाटक राज्य में भी मंतातरण को गुनाह बताकर कानून बनाए गए हैं।