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रोहिंग्या मुसलमान निर्जन द्वीप भसन चार पर

गुरुवार, 31 दिसंबर 2020 | दिसंबर 31, 2020 WIB Last Updated 2021-04-01T09:35:04Z
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रोहिंग्या मुसलमान निर्जन द्वीप भसन चार पर

कई सालों से बांग्लादेश में चल रहे हैं। मानव अधिकार समूह के विरोध के बावजूद भी बांग्लादेश ने 1,800 से कहीं ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान को मंगलवार को दूरदराज के एक निर्जन द्वीप पर पहुंचा दिया है। यह एक ऐसा द्वीप जहां पर हर साल बाढ़ आने की गुंजाइश होती है ।
इनकी कैसे ,क्या मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवानी है । इनका बिना ध्यान रखें उन्हें वहां पहुंचा दिया गया है। इन्हें नौसेना के 5 पोत के जरिए वहा पहुंचाया गया था । भसन चार नामक यह द्वीप 20 साल पहले तो समुद्र से भरा हुआ था ।पर अब यह बाहर निकल कर आया है और उसी पर रोहिंग्या मुसलमान को बसाया जा रहा है । मानव अधिकार समूह द्वीप पर रोहिंग्या मुसलमान की सुरक्षा को लेकर कई चिंताएं जताई जा रही है । क्योंकि द्वीप निचला होने के साथ ही तूफान के लिहाज से भी ज्यादा संवेदनशील बताया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई है और कहा है कि भसन चार द्वीप में वह शामिल नहीं है। क्युकी यह द्वीप किसी भी तरह रहने लायक भी नहीं है। बांग्लादेश सरकार ने इन लोगों को सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की है । संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि बांग्लादेश पर एक सुरक्षा सुनिश्चित करें और भेजे गए लोगों को किसी ओर पर सुरक्षित तरीके से और व्यवस्थित तरीके से बसाए। बांग्लादेश की नौसेना ने मंगलवार को 1804 रोहिंग्या शरणार्थियों को द्वीप पर बसाया है । इस महीने की शुरुआत में ऐसा पहली बार किया है कि 1042 रोहिंग्या मुसलमानों को इस द्वीप पर बसाया गया हैं। सरकार ने कहना है की उन्होने एक लाख लोगों के रहने की व्यवस्था की है और द्वीप को किसी भी खतरे से इनकार भी किया है।
बांग्लादेश ने मंगलवार को चटगांव से नौसेना के पोत में रोहिंग्या मुसलमान को बंगाल की खाड़ी में स्थित दूरदराज एक निर्जन द्वीप में भसन चार ले जाया गया है।
रोहिंग्या नेता नोसिमा ने कहा कि म्यांमार सरकार ने हमारा बलात्कार किया और हमारी हत्या की। इसलिए हमें सुरक्षा की जरूरत है। बिना सुरक्षा के हम कभी वापस नहीं जाएंगे। दक्षिण पूर्व बांग्लादेश में एक शिविर के रोहिंग्या सदस्य मोहम्मद इस्लाम ने कहा कि हमें नागरिकता, सुरक्षा की असली गारंटी और मूल जन्म स्थान का वादा चाहिए। इसलिए रोहिंग्या शरणार्थियों अभी बांग्लादेश में ही रह रहे हैं।