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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बारे में मजेदार रोचक जानकारी

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020 | दिसंबर 18, 2020 WIB Last Updated 2021-04-01T09:34:46Z
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सुभाष चन्द्र बोस , जिन्हें हम प्यार से नेताजी कहते हैं। नेताजी का जन्म 23 जनवरी ,1897 को ओड़ीसा के कटक में हुआ। नेताजी के पिता जानकीनाथ बोस और माता प्रभावती के पांचवी संतान थे।





लंदन से लौटने के बाद नेताजी की मुलाक़ात देशबंधु चितरंजन दास से हुई थी। जिन्होंने फॉरवर्ड नाम से एक अंग्रेजी अखबार प्रकाशित किया हुआ था।





नेताजी ने इंडियन सिविल सर्विसेस की नौकरी छोड़ देश की सेवा को अपना प्रथम कर्तव्य समझा और देश के आंदोलन को एक नई धार दी। जिसकी वजह से 1921 में  6 महीने की जेल भी हुई थी। 1938 में हरिपुरा अधिवेशन में नेताजी को कांग्रेस अधिवेशन का प्रमुख बनाया गया था। नेता जी ने स्वतंत्रता





 की तारीख तय करने को कहा और सफलता न मिलने पर एक जोरदार आंदोलन की इच्छा जताई। पर महात्मा गांधी इसके लिए तैयार नहीं हुए और 1939 में नेताजी ने कांग्रेस से अलग एक फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन किया।





क्रांतिकारी रासबिहारी बोस से प्रभावित होकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी की लडाई को लेकर विदेशी मत जुटाने की ठान ली थी। और वे पुलिस को चकमा देकर काबुल के रास्ते जर्मनी जा पहुंचे। जहां उनकी मुलाकात हिटलर से हुई। हिटलर ने नेताजी की हरसंभव, अंग्रेजों  हुकूमत को हिलाने में मदद की। नेता जी ने इटली और जर्मनी में युद्ध बंदियों में बंधे भारतीयों की एक मुक्त सेना भी बनाई। क्योंकि उनका विश्वास था । कि विश्व युद्ध के दौरान ही हम अंग्रेजों पर हमला कर स्वतंत्रता प्राप्ति कर सकते हैं। 1943 में नेताजी जापान जहां पहुंचे जहां उन्हें कैप्टन मोहन सिंह द्वारा आजाद हिंद फौज के नेतृत्व की कमान दी।





1944 फरवरी ,में उन्होंने अंग्रेजों पर हमला कर दिया और कई भारतीय क्षेत्रों को आजाद करवाया। 1944 अक्टूबर में उन्होंने आजाद हिंद फौज की  सेना को  भाषण  देते हुए कहा था। कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।





देश के अंदर व बाहर स्वतंत्रता संग्राम में लड़ाई लड़ने वाले देश के महान सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमिका आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करने से लेकर अंग्रेजों से लोहा लेने तक है।





 आजादी के अग्नि कुंड में  अपने खून से प्रज्वलित कर रहे , ऐसे  एक महान  थे । नेताजी सुभाष चंद्र बोस |





स्वतंत्रता संग्राम  लड़ाई में बोस ने भारत से हजार किलोमीटर दूर एक ऐसी अविभाजित सेना का निर्माण किया ।  जिससे अंग्रेज सेना भी कापती  थी।  आजाद हिंद फौज ।





नेताजी हमेशा कहा करते थे। की दुनिया में सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है।





स्वतंत्र दी नहीं जाती ली जाती है,  तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। जैसे जोशीले नारे भी नेता जी ने दिए ।





Red fort trial आजाद हिंद फौज के तीन सैन्य अधिकारियों के खिलाफ चलाए गए मुकदमे से जुड़ा है| जिसकी सुनवाई नवंबर 1945, से जनवरी 1946 तक दिल्ली के लाल किले में हुई। और जिस वक्त इंडियन नेशनल आर्मी के कर्नल प्रेम सहगल, कर्नल गुरु बक्श सिंह धिलर और मेजर जनरल शहनवाज खान पर जब एक साथ मुकदमा चल रहा होता था। तब बाहर सड़कों पर देश के नौजवान " पूरे देश की एक आवाज सहगल और शाहनवाज " जैसे कई नारे लगाए जाते थे। इस मुकदमे के कारण आज भी दिल्ली के लाल किले पर एक म्यूजियम बनाया गया है।  यह मुकदमा आजाद हिंद फौज पर चलाए गए पूरे 10 मुकदमे में से पहला मुकदमा था।





नेताजी की सेना ने, ना सिर्फ गोरे लोगों को हराया। बल्कि भारत के बड़े क्षेत्र को इनसे आजाद कराया। उन्होंने देश के लिए जो किया । उनके कार्य को देश कभी भूल नहीं पाएगा।


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