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1949 के बाद हिंदी मातृ भाषा से राष्ट्र भाषा कैसे बनी ।

सोमवार, 14 सितंबर 2020 | सितंबर 14, 2020 WIB Last Updated 2021-04-01T09:33:49Z
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आइए जाने हिंदी को 14 सितंबर 1949 का वो दिन,जब संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसके बाद भारत मे हिन्दी भाषा जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राजभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। और हिंदी की उपयोगिता इतनी बढ़ते जा रही है कि लगातार 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।





हिदी को राष्ट्र भाषा बनाने वाले पुरोधा





कुछ समय के बाद "श्री व्यौहार राजेन्द्र सिंहा"  ने लगातार हिंदी को मातृ भाषा से राष्ट्र भाषा बनाने की पहल की और इतना बढ़ा अभियान के रूप में  विषय लोगों के सामने प्रस्तुत किया,कि उनको हिंदी राष्ट्रभाषा का पुरोधा के रूप में  भारत के जन देखने लगे। 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया ।





             इसके पहले 1918 में गांधी जी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।





भारत के विद्दालयों पर हिंदी भाषा पर कार्यक्रम किये जाते हैं।





हिन्दी दिवस के दौरान कई कार्यक्रम भारत के विद्दालयों पर होते हैं इस दिन छात्र-छात्राओं को हिन्दी के प्रति सम्मान और दैनिक व्यवहार में हिन्दी के उपयोग करने आदि की शिक्षा दी जाती है,इस दिन हिन्दी निबंध लेखन, वाद-विवाद हिन्दी टंकण प्रतियोगिता आदि आयोजित की जाती है।





हिंदी भाषा की प्रेरणा को जन मानस तक प्रचारित करने हेतु दिया जाता है सम्मान





हिन्दी दिवस पर हिन्दी के प्रति लोगों को प्रेरित करने हेतु भाषा सम्मान की शुरुआत की गई है, यह सम्मान प्रतिवर्ष देश के ऐसे व्यक्तित्व को दिया जाएगा । जिसने जन-जन में हिन्दी भाषा के प्रयोग एवं उत्थान के लिए विशेष योगदान दिया है।





इसी दौरान सुझाव भी दिये जाते





हिन्दी में निबंध लेखन प्रतियोगिता के द्वारा कई जगह पर हिन्दी भाषा के विकास और विस्तार हेतु कई सुझाव भी प्राप्त किए जाते हैं । खास बात यह है कि 14 सितंबर के अलावा हिन्दी भाषा को कुछ और दिन याद रखें इस कारण"राष्ट्रभाषा सप्ताह" का भी आयोजन होता है।





हिंदी दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य





हिंदी दिवस का मुख्य उद्देश्य वर्ष में एक दिन इस बात से लोगों को रूबरू कराना है,कि जब तक वे हिन्दी का उपयोग पूरी तरह से नहीं करेंगे तब तक हिन्दी भाषा का विकास नहीं हो सकता है,विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है।





एक जानकारी के अनुसार





विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं। इसके साथ - साथ, सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं।





विश्व हिन्दी सम्मेलनों का प्रारम्भ





भारत मे 10 जनवरी 1975 को नागपुर में एक सम्मेलन आयोजित किया गया,जिसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी का विकास करने और इसे प्रचारित-प्रसारित करने हेतु रखा गया, ऐंसा आयोजन सम्पूर्ण विश्व मे भारत की धरती पर हुआ जिसे प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन नाम दिया गया। जो कि प्रथम विश्व स्तरीय हिन्दी सम्मेलन था।





भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी । ठीक इसके बाद से ही हर बर्ष 10 जनवरी को 'विश्व हिन्दी दिवस' के रूप में मनाया जाता है। एक रोचक बात यह है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था।