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पहले घर घर अब खेतों में भी जाकर शिक्षक गण जाकर लॉक डाउन में पढ़ने की प्रेरणा देते हुए

शुक्रवार, 28 अगस्त 2020 | अगस्त 28, 2020 WIB Last Updated 2021-04-01T09:33:24Z
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मण्डला जिले में लॉक डाउन में जहां बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से चौपट हो गई है। वहीं जैसे मण्डला जिले के माध्यमिक शाला औघट खपरी,पूर्वा के शिक्षक और इसके साथ मण्डला जिला के अंतर्गत नैनपुर विकासखंड की माध्यमिक शाला सर्रा पिपरिया जिले के लिए उदाहरण बन कर सामने आये हैं। यहां के शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।





शिक्षक बने उदाहरण





माध्यमिक शाला के बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों की लगन जिले के लिए उदाहरण बन रही है। जिले में भले ही 'हमारा घर हमारा विद्यालयÓ अभियान चलाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कुछ स्कूलों के शिक्षक सिर्फ खाना पूर्ति कर रहे हैं। वहीं नैनपुर विकासखंड का माध्यमिक शाला सर्रा पिपरिया जिले के लिए उदाहरण बन कर सामने आया है। बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी शिक्षक बखूबी निभा रहे हैं।





निर्धारित समय मे पहुंचते शिक्षक





स्कूल के लिए निर्धारित समय सुबह 10.30 बजे से शाम 4 बजे तक शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिसमें से दोपहर 2 बजे तक चिन्हित 10 स्थानों पर जाकर छात्र-छात्राओं को पढ़ा रहे हैं। माध्यमिक शाला पिपरिया वैसे तो मॉडल स्कूल के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उसी पहचान को बनाए रखने के लिए शाला परिसर पर भी शिक्षकों द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।





शाला के शिक्षकों ने शाला की कराई साफ सफाई





ग्राम पंचायत के सहयोग से परिसर की साफ सफाई कराई गई है। स्कूल के गार्डन से खरपतवार अलग किया गया है। शासकीय स्कूल होने के बाद भी स्कूल परिसर व बच्चों में अनुशासन बड़े-बड़े निजी स्कूलों को पीछे छोड़ रहा है। शाला में छठवीं से आठवीं तक 73 बच्चे दर्ज हैं। पढ़ाई व शाला परिसर का रखरखाब यहां पदस्थ प्रधानाध्यापक संजीव सोनी, गणेश ठाकुर, सुरेश श्रीवास्तव मिलकर कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक के दिशा निर्देश पर घर-घर पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई पर नजर बनाए हुए हैं। माध्यमिक शाला सर्रा पिपरिया में सर्रा पिपरिया के साथ ही जामून टोला गांव के बच्चे अध्यनरत हैं।





बच्चों का उत्साह बढाने हेतु मना रहे बच्चों का जन्म दिन





बच्चों का उत्साह बनाए रखने के लिए शाला के सभी बच्चों का जन्मदिवस मनाया जाता है। स्कूल बंद होने के बाद भी जन्म दिन पर बच्चों के घर में तिलक वंदन व मिठाई खिलाकर बधाई दी जा रही है।





पालकों से वाद-विवाद





ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण की वर्तमान परिस्थिति से अनजान अभिभावक शिक्षकों से बिना कारण ही वाद-विवाद करने लगते हैं। नशे में या जागरूकता के अभाव के कारण अभिभावक बच्चों को घर में पढऩे से भी मना करते हैं। जिनका कहना है कि बच्चों को स्कूल में ही पढ़ाया जाए। जिन्हें समझाना शिक्षकों के लिए मुश्किल हो रहा है। बैगा टोला, खैरमाई टोला में शिक्षकों को पालकों का सहयोग नहीं मिल रहा है। यहां पालक बच्चों को खेत या मछली मारने ले जा लेते हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों व जनप्रतिनिधियों के सहयोग से भी पालकों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।





शिक्षकों ने हिम्मत नही हारी





कुछ स्थानों पर बारिश के समय में शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। फिर भी शिक्षकों ने हिम्मत नहीं हारी और नियमित रूप से बच्चों के घर पहुंचकर शिक्षा प्रदान की।





खास बात यह है कि :- खपरैल टोला, मिलन टोला में पक्की सड़क नहीं है। गांव से भी दूरी अधिक है। बारिश के दौरान कीचड़ भरे रास्ते से गाड़ी ले जाना मुश्किल हो रहा है। दूर गाड़ी खड़े कर बच्चों के घर तक पहुंचना पड़ रहा है। कुछ पालकों को छोड़कर अन्य पालक व बच्चे उत्साह के साथ पढ़ाई में सहयोग कर रहे हैं। समय पर होमवर्क करने, समय से पहले व्यवस्थित रूप से बैठकर पढ़ाई करते हुए बच्चों को देखकर मन में शांति मिलती है और शिक्षकों का उत्साह भी बढ़ता है।





प्रधानाध्याप के अनुसार लॉकडाउन के कारण पढ़ाई प्रभावित ना हो इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। शाला के सभी शिक्षकों सहयोग मिल रहा है। कुछअभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं जिससे कुछ समस्या आ रही है। शाला परिसर व किचन गार्डन की सफाई भी कराई जा रही है।


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