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Fatf kya hai | Financial action task force in hindi | Fatf upsc in hindi

शनिवार, 31 अगस्त 2019 | अगस्त 31, 2019 WIB Last Updated 2021-04-01T09:31:45Z
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Fatf kya hai :- fatf का फुल फोम क्या होता हैआइये जानते है वित्तीय कार्रवाई कार्यदल  के बारे में विस्तार से और महत्वपूर्ण जानकारी जो UPSC परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण है. और हम FATF की ब्लैक सूची और ग्रे सूची को विस्तार से जानेंगे आज हम जानेंगे  Fatf kya hai , Financial action task force के सदस्य व पर्यवेक्षक, FATF के उद्देश्य एवं कार्य, FATF प्लिनरी बैठक 2019 के प्रमुख बिंदु


Fatf kya hai | Financial action task force in hindi


FATF kya hai ? FATF का Full Form होता है ( Financial action task force ) FATFकी स्थापना जुलाई , 1989 में पेरिस में आयोजित एक शेखर सम्मेलन में 7 देशों के समूह G7 द्वारा की गई थी . FATF का प्रारंभिक उद्देश्य एफएटीएफ मनी लांड्रिंग  से निपटने के उपायों की जांच करना और इसके विस्तार को रोकना था , किंतु समय-समय पर इसके उद्देश्य एवं कार्यों का विस्तार किया गया विगत कुछ वर्षों में विश्व स्तर पर आतंकवादी हमले आतंकी वित्त पोषण एवं वित्तीय संदिग्ध व्यवहारो (मनी लांड्रिंग) इत्यादि की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है इन सब से निपटने से संबंधित एक स्वतंत्र अंतरसरकारी वैश्विक निकाय वित्तीय कार्यवाही कार्यबल एफएटीएफ (FATF) ने जून 2019 में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने या शामिल कर देने की चेतावनी दी

 

उल्लेखनीय है , कि यह चेतावनी 16 से 21 जून 2019 के मध्य अमेरिका के ऑरलैंडो फ्लोरिडा में हुई बैठक के दौरान की गई बैठक में FATF ने अक्टूबर 2019 को पहले पाकिस्तान को अपनी जमीन पर आतंकवाद को संरक्षण देने तथा आतंकी फंडिंग को रोकने से संबंधित वैश्विक चिंताओं को दूर करने हेतु भरोसेमंद प्रमाणित किए जाने योग्य एक मजबूत कदम उठाने को कहा है कि भारत ने पुलवामा हमले के पश्चात FATF से उचित कार्रवाई करने की आवाज उठाई थी

 

हालांकि FATF ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था आतंकवादी समूह की फंडिंग पर रोक लगाने एवं असफल रहने वाले देशों को FATF की संदिग्ध सूची में शामिल कर दिया जाता है जिससे संबंधित देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले अनेक प्रकार की सुविधाओं पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है


 

Fatf kya hai | Financial action task force in hindi


FATF एक अंतरसरकारी निकाय ,जो वर्ष 1989 में अपने सदस्य अधिकार क्षेत्रों के मंत्रियों द्वारा स्थापित किया गया था । ऐसे ही आपका उद्देश्य मानकों को निर्धारित करना और धन शोधन आतंकवादी के वित्त पोषण तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए अन्य संबंधित खतरों से निपटने के लिए कानूनी विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है . FATF इसलिए एक नीति निर्माण निकाय है क्योंकि यह संबंधित क्षेत्रों में राष्ट्रीय विधि और नियामक सुधार लाने हेतु आवश्यक राजनीति इच्छा शक्ति उत्पन्न करने के लिए काम करता है .


FATF  के बारे में विस्तार से जानकारी :-


FATF ने अनुशंसाओ की एक श्रंखला विकसित की है . जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग ( धनशोधन ) का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक और आतंकवाद के वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के रूप में मान्यता प्राप्त है . वे वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए इन खतरों हेतु समन्वित प्रतिक्रिया का आधार बनाते हैं ,और एक निश्चित स्तर पर कार्रवाई को सुनिश्चित करने में सहायता करते हैं .

 

इसके लिए वर्ष 1990 में पहली बार जारी किए गए FATF की सिफारिश को वर्ष 1996 , 2001 , 2003 और 2012 में यह सुनिश्चित करने के लिए संशोधन किया गया कि वे सार्वभौमिक अनुप्रयोग के लिए अध्यतन और प्रासंगिक रहे FATF आवश्यक उपायों को लागू करने , मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण तकनीकों और उसे रोकने के उपायों की समीक्षा करने में अपने सदस्यों की प्रगति की निगरानी करता है और विश्व स्तर पर उपयुक्त उपायों को अपनाने और लागू करने को बढ़ावा देता है . इसके अतिरिक्त अन्य अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को दुरुपयोग से बचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की कमजोरियों की पहचान करने का काम भी करता है .

FATF के सदस्य व पर्यवेक्षक


FATF के 37 सदस्य अधिकार क्षेत्र ( देश ) व दो क्षेत्रीय संगठन खाड़ी सहयोग परिषद और यूरोपीय आयोग है , जो दुनिया के सभी हिस्सों में सबसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं.इसके अतिरिक्त FATF पर्यवेक्षक के रूप में कई महत्वपूर्ण वैश्विक संगठनों को भी शामिल करता है , जिनमें कुछ प्रमुख संगठनों के नाम इस प्रकार हैं -


[caption id="" align="aligncenter" width="320"] fatf kya hai[/caption]

 


  • अफ्रीका विकास बैंक

  • एशियाई विकास बैंक

  • एडीबी(ADB),

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ (IMF),

  • विश्व बैंक

  • बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसन समिति

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति संगठन

  • विश्व सीमा शुल्क संगठन (WCO) इत्यादि


ध्यातव्य है कि FATF का निर्णय लेने वाला निकाय , FATF प्लिनरी है , इसकी बैठक वर्ष में तीन बार होती है . इसके अध्यक्ष का चुनाव सभी सदस्यों द्वारा किया जाता है , जिसका कार्यकाल 1 वर्ष के लिए होता है .

FATF के उद्देश्य एवं कार्य


FATF की स्थापना जुलाई , 1989 में पेरिस में आयोजित एक शेखर सम्मेलन में 7 देशों के समूह G7 द्वारा की गई थी . FATF का प्रारंभिक उद्देश्य मनी लांड्रिंग (money-laundering )से निपटने के उपायों की जांच करना और इसके विस्तार को रोकना था , किंतु समय-समय पर इसके उद्देश्य एवं कार्यों का विस्तार किया गया ,जो निम्न प्रकार है-

 

मानकों को निर्धारित करना और मनी लांड्रिंग (money-laundering )आतंकवादी वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए एक संबंधित समस्याओं एवं खतरों से निपटने के लिए कानूनी विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है .अपने स्वयं के सदस्यों के द्वारा शुरू किया गया FATF की सिफारिशों को लागू करने में देशों की प्रगति की निगरानी करता है .fatf money-laundering और आतंकवादी वित्तपोषण तकनीकों और उपयुक्त उपायों की समीक्षा करता है और विश्व स्तर पर FATF सिफारिशों को अपनाने और लागू करने को बढ़ावा देता है .

आतंकी वित्तपोषण से निपटने हेतु FATF के प्रयास


आतंकी वित्तपोषण से निपटना वर्ष 2001 से ही FATF के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है . हालांकि वर्ष 2015 से वैश्विक स्तर पर आतंकी खतरे का क्षेत्र एवं स्वरूप काफी विस्तृत एवं गहरा हो गया है .इस दौरान विश्व के कई शहरों में आतंकी हमले हुए हैं तथा इन आतंकी हमलों के लिए तथाकथित आईएसआईएल( ISIL) और अल-कायदा को जिम्मेदार माना गया है .

 

FATF आतंकी वित्तपोषण से निपटने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण केंद्रीय भूमिका निभाता है तथा आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए वैश्विक मानकों को स्थापित करके अपनी भूमिका के माध्यम से आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के वित्तीय प्रावधानों को लागू करने में न्यायालयों की सहायता करता है और देशों के द्वारा आतंकी फंडिंग रोकने की क्षमता का मूल्यांकन करता है . इसके बावजूद कई देशो ने अभी तक FATF मानकों को प्रभावी ढंग से लागू नही किया है .

जून 2019 FATF बैठक 


FATF का निर्णय लेने वाला निकाय एक FATF प्लिनरी है , जिसकी बैठक वर्ष में तीन बार होती है . इसके तहत 16 से 21 जून 2019 के मध्य FATF की बैठक संयुक्त राज्य अमेरिका के आरलैंडों में मार्शल बिलिंग्सल की अध्यक्षता में आयोजित हुई . इस प्लिनरी बैठक के दौरान FATF के प्रतिनिधियों ने FATF की 30वी वर्षगांठ मनाई .

FATF प्लिनरी बैठक 2019 के प्रमुख बिंदु


FATF प्लिनरी बैठक के दौरान , प्रतिनिधियों ने निम्न मुद्दों पर चर्चा की प्रमुख रणनीतिक पहल - आभासी परिसंपत्तियों ( वर्चुअल एसेट्स ) गतिविधियों के जोखिम को कम करना , जिसमें सार्वजनिक विवरण और वर्चुअल एसेट्स और वर्चुअल एसेट्स प्रोवाइडर पर जोखिम-दृष्टिकोण मार्गदर्शन शामिल है .मनी लॉन्ड्रिंग आतंकी वित्तपोषण से निपटने के उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन पर प्रगति का विश्लेषण करने हेतु एक रणनीतिक समीक्षा पहल शुभारंभ किया गया और FATF/FATF स्टाइल रिजनल बाडिज़ मूल्यांकन प्रक्रियाओ की समीक्षा करने एवं सकारात्मक बदलाव के विभिन्न पहलुओं की पहचान करने का निर्णय लिया गया .

 

सऊदी अरब पूर्ण FATFसदस्यता प्राप्त करने वाला पहला अरब देश

 


[caption id="" align="alignnone" width="400"] fatf kya hai[/caption]

संयुक्त राज्य अमेरिका के आर लैंडो , फ्लोरिडा में (16 से 21 जून 2019 )आयोजित FATF की वार्षिक आम बैठक के पश्चात सऊदी अरब FATF की पूर्ण सदस्यता प्राप्त करने वाला पहला अरबी देश बन गया .

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2004 के पश्चात से सऊदी अरब FATF समूह के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका शाखा का संस्थापक रहा है तथा वह 2015 की शुरुआत में सऊदी अरब को FATF के पर्यवेक्षक सदस्य के रूप में दर्जा प्रदान किया गया था .सऊदी अरब की पूर्ण सदस्यता के पश्चात FATF ने यह बताया है कि सऊदी अरब के दिशा-निर्देशों को लागू करने के अपने प्रयासों में काफी प्रगति की है . इस तरह सऊदी अरब के सदस्यता के पश्चात FATF के कुल सदस्यों की संख्या 39 हो गई है .

FATF की ब्लैक सूची और ग्रे सूची


FATF की दो प्रकार की सूचियां हैं ब्लैक सूची और ग्रे सूची . आइये जानते है

 

ब्लैक सूची - FATFइस सूची में उन देशों को सूचीबद्ध करता है ,जो आतंकी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का समर्थन करते हैं अर्थात इन देशों में मौजूद वित्तीय प्रणाली की मदद से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग और मनी लांड्रिंग को बढ़ावा मिलता है उल्लेखनीय है कि FATFब्लैक सूची को FATF द्वारा वर्ष 2000 से जारी किया जा रहा है .

 

ग्रे सूची - एफ ए टी एफ FATF की इस सूची में उन देशों को शामिल किया जाता है ,जो कि अपने देशों की वित्तीय प्रणाली को आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपयोग होते हैं होने देते हैं . यदि कोई देश ग्रे सूची में शामिल कर लिया जाता है ,तो वह आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देना बंद नहीं करता है ,तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत से देशों द्वारा कई तरह से प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है

 

FATFउन देशों को इस लिस्ट में शामिल कर देता है , जो आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपने वित्तीय प्रणाली का उपयोग होने देता है .उसके साथ ही इसमें से उन देशों के नाम हटा दिए जाते हैं ,जो आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग की गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकते हैं . यह लिस्ट FATFद्वारा कुछ समय अंतराल पर संबंधित देशों के द्वारा किए जाने वाले गतिविधियों के अनुसार जारी अपडेट किया जाता है .वर्तमान स्थिति के अनुसार केवल दो देश- ईरान और उत्तर कोरिया ब्लैक सूची में है ,जबकि ग्रे -सूची में पाकिस्तान ,श्रीलंका ,सर्बिया, त्रिनिदाद , टोबैगो , सीरिया और यमन जैसे सात देश शामिल है .

FATF और भारत


भारत को FATF और एशिया प्रशांत समूह एपीजी ( APG ) दोनों द्वारा पूर्ण सदस्यता का दर्जा प्राप्त है . भारत ने FATF की सदस्यता 25 जून 2010 (2006 से पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त हुआ) तथा एपीजी (APG)का मार्च 1998 में सदस्यता प्राप्त की .इन दोनों समूह में सदस्यता प्राप्त करने के पश्चात से ही भारत ने आतंकवाद ,आतंकी वित्तपोषण ,मनी लांड्रिंग इत्यादि जैसे अवैध गतिविधियों से लड़ने में भरपूर सहयोग किया है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचो पर आतंकवाद को सबसे बड़ा वैश्विक खतरा व मानवता का विरोधी बताया है .

 

भारत ने इस संदर्भ में हाल में हुए पुलवामा आतंकी हमले ,पूर्व में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले ,श्रीलंका में हुए चर्च पर हमले , पिछले वर्ष फ़्रांस पर हुए श्रृंखलाबद्ध बम ब्लास्ट को उदाहरण के रूप में वैश्विक समुदाय के समक्ष प्रस्तुत किया है .जून 2019 में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में भी भारत ने विश्व के सभी देशों से आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर एवं आतंकवाद पर सम्मेलन आयोजन करने की वकालत की .इसके अलावा भारत ने अन्य 15 देशों के संदिग्ध व्यवहारो मनी लांड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण से निपटने के लिए संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान करने व आवश्यक कार्रवाई में सहयोग करने संबंधी द्विपक्षीय समझौता पर हस्ताक्षर किए हैं इस प्रकार उपरोक्त तथ्य मनी लांड्रिंग , आतंकवाद व आतंकी वित्तपोषण से भारत की लड़ने व इसके उन्मूलन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है करता है .

FATF financial action task force की आगे की राह


मनी लॉन्ड्रिंग , आतंकवाद , आतंकी वित्तपोषण संपूर्ण विश्व के समक्ष एक सबसे बड़ी चुनौती है तथा विश्व के सभी देश इस समस्या से ग्रसित हैं तथा विगत वर्षों से इस तरह गतिविधियों एवं घटना में काफी वृद्धि हुई है , जो कि एक चिंताजनक स्थिति है अतः इस चुनौती से निपटने के लिए विश्व के सभी देशों को एक ठोस व प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है . निसंदेह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है , किंतु विश्व के अनेक देशों के द्वारा इसके प्रावधानों को आज भी सही तरीके से लागू नहीं किया गया है . अतः इन देशों द्वारा इसके प्रावधानों को लागू करके FATF को और अधिक प्रभावी व मजबूत बनाने की आवश्यकता है .

 

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